बानिरा गिरी

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वानिरा गिरी
जन्मवानिरा गिरी
(१९४६-०४-११) अप्रिल ११, १९४६ (उमेर ७३)
खर्साङ्ग, दार्जिलिङ्ग
वासस्थानमीनभवन, काठमाडौं, काठमाडौं महानगरपालिका, नेपाल
राष्ट्रियतानेपालनेपाली
नागरिकतानेपाली
शिक्षाएम.ए., एम.एड., विद्यावारिधि (नेपाली साहित्य)
पेशाशिक्षण, लेखन
चिनारीको कारणकविता, उपन्यास
प्रशिद्ध कार्यकारागार, विर्बन्ध, जीवन थामहरु, एउटा जिउँदो जङ्गबहादुर, मेरो आविष्कार
गृहनगरकाठमाडौं
जिवनसाथीशङ्कर गिरी
सन्तानअपूर्ण गिरी, अपराजिता गिरी
मातापिताइन्द्रराज गिरी, जानकीदेवी
पुरस्काररत्नश्री स्वर्ण पदक
गोरखा दक्षिण बाहु चौथा
लोकप्रिया देवी पुरस्कार-२०४८
साझा पुरस्कार - २०५६
महाकवि देवकोटा पुरस्कार - २०७३

कविता सङ्ग्रह[सम्पादनस्रोत सम्पादन]

  • एउटा जिउँदो जङ्गबहादुर
  • जीवन: थामहरू - २०३४
  • शब्दातीत शान्तनु - २०५६

उपन्यास[सम्पादनस्रोत सम्पादन]

  • कारागार - २०३५[१]
  • निर्बन्ध - २०४४

आत्मकथा[सम्पादनस्रोत सम्पादन]

  • मेरो आविष्कार - २०४१

सन्दर्भ सामग्रीअन[सम्पादनस्रोत सम्पादन]

  1. "कारागार", madanpuraskar.org, अन्तिम पहुँच २०१८-०४-१५