ऋतु

विकिपिडिया बठेइ
Jump to navigation Jump to search
पारितन्त्रा: अन्सारअ छै ऋतुउन
खगोलीय मौसम का प्रत्येक परिवर्तन माइ पृथ्वी को प्रदीपन

ऋतु यक वर्ष है नानो कालखण्ण हो जै माइ मौसम कि दशाअन यक खास प्रकार कि हुन्छिन। यो कालखण्ण यक वर्ष लाइ विभिन्न भागअन माइ विभाजित अरन्छ जै बेला पृथ्वी ले सूर्य कि परिक्रमा का परिणामस्वरूप दिन कि अवधि, तापमान, वर्षा, आर्द्रता इत्यादि मौसमी दशाअन यक चक्रीय रूप माइ बदेलीनान। मौसम कि दशाअन माइ वर्ष भरि हुन्या येइ चक्रीय बदलाव को प्रभाव पारितन्त्र माइ पड़न्छ रे यिसै प्रकार ले पारितन्त्रीय ऋतुउन निर्मित हुनान। ऋतु मौसम लाई आधार मानिबर बनाइया को समय मापन एकाई हो। हिन्दू पंचाङ्गका अनुशार ऋतुउन लाइ ६ भाग माइ विभाजीत गरियाको छ भँण्या अंग्रजी माइ ४ भाग माइ विभाजित गरियाको छ।

नेपाल तथा भारत माइ परम्परागत रूप बठेइ मुख्यतः छै ऋतुउन परिभाषित अरीर्याहान।[१] -

ऋतु हिन्दू मास ग्रेगरियन मास
वसन्त (Spring) चैत्र बठेइ वैशाख (वैदिक मधु रे माधव) मार्च बठेइ अप्रिल
ग्रीष्म (Summer) ज्येठ बठेइ असाड़ (वैदिक शुक्र रे शुचि) मे बठेइ जून
वर्षा (Rainy) साउन बठेइ भदो: (वैदिक नभः रे नभस्य) जुलाइ बठेइ अगस्ट
शरद (Autumn) असोज बठेइ कातिक (वैदिक इष रे उर्ज) सेप्टेम्बर बठेइ अक्टोबर
हेमन्त (pre-winter) मैंसिर बठेइ पूष (वैदिक सहः रे सहस्य) नोभेम्बर बठेइ डिसेम्बर
शिशिर (Winter) माघ बठेइ फागुन (वैदिक तपः रे तपस्य) जनवरि बठेइ फेब्रुअरि

ऋतु परिवर्तन को कारण[सम्पादनस्रोत सम्पादन]

ऋतु परिवर्तन को कारण पृथ्वी ले सूर्य का चारै तिर अद्द्या परिक्रमण रे पृथ्वी को अक्षीय झुकाव हो। पिर्थिवि को अक्ष येइ का परिक्रमा पथ ले बन्न्या वला समतल सित यक कोण बनौन्छ जै कारण ले परिक्रमा का बेला उत्तरी या दक्षिणि गोलार्ध मै है कोइ यक गोलार्ध सूर्जे कि तिर झुकन्छ। यो झुकाव सुर्जे का चारै तिर हुन्या परिक्रमा का कारण वर्ष का अलग-अलग समय माइ अलग-अलग हुन्छ जै माइ दिन-रात कि अवधि माइ घट-बड़ होइबरे यक वार्षिक चक्र निर्मित हुन्छ। योइ ऋतु परिवर्तन को मूल कारण हो।

पश्चिमी ऋतुउन[सम्पादनस्रोत सम्पादन]

पश्चिमी प्रचलन अथवा अङरेजि का अन्सारअ यक वर्ष माइ चार ऋतु हुनान तनरा नाउँ यई प्रकार छन्-

क्र.सं. ऋतु को नाउँ और नाम अङरेजि नाउँ
वसन्त स्प्रिंग सिजन
ग्रिष्म गर्मी समर सिजन
वर्षा अटम सिजन
शिसिर हिउँद विन्टर सिजन

सन्दर्भअन[सम्पादनस्रोत सम्पादन]

  1. अजहर हाशमी (July 27, 2013). "ऋतुउन सित जोड़िया: हमरो जीवन". राजस्थान पत्रिका. Retrieved July 28, 2013.

यिन लै हेरऽ[सम्पादनस्रोत सम्पादन]