बिश्नोई
| बिश्नोई | |
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बिश्नोई (वा विष्नोई) एक हिन्दू वैष्णव समुदाय अथवा पन्थ हौ, जिकर मुख्य रूप ले पश्चिमी थार मरुभूमि अणि भारत का उत्तरी राज्य मन मा पाइन्छ। समय सँग बिश्नोई समुदाय हिन्दू जात को रूप मा बिकास भयौ मानिन्छ।[१][२] यस समुदाय का लागि गुरु जाम्भेश्वर (गुरु जाम्भोजी, गुरु जाम्भा) (१४५१–१५३६) ले दिइया २९ वटा नियम (सिद्धान्त) आधार मानिन्छ।[३]
सन् २०१० तक, बिश्नोई पन्थ का लगभग ६,००,००० अनुयायी उत्तरी अणि मध्य भारत मा बसन लाग्या थिया।[४] गुरु जाम्भेश्वर ले सन् १४८५ मा समराथल धोरा मा यो पन्थ को स्थापना करी, अणि उनका शिक्षा शब्दवाणी नाम ले जान्या जांछ, जिमां १२० वटा शब्द छन। उनले ५१ बर्स तक भारत भरि घुमी घुमी उपदेश दियौ। उनका शिक्षा अनुयायी अणि वातावरण बचावन वाला मन लाई प्रेरणा दिन्छ।
व्युत्पत्ति
[सम्पादन | स्रोत सम्पादन]बिश्नोई शब्द बिस (२०) अणि नौ (९) बाट आयल मानिन्छ, जसको अर्थ २९ सिद्धान्त हो।[५]
उत्पत्ति
[सम्पादन | स्रोत सम्पादन]बिश्नोई एक पन्थ हौ जिकर २९ सिद्धान्त अपनाय, जसमा समाजिक नैतिकता, वातावरण संरक्षण अणि व्यक्तिगत सफाइ मा जोड दियौ गयो। यस समुदाय का अधिकांश मान्छे जाट जात बाट आयल छन।[६]
तर यसमा बनिया, राजपूत, खाटी अणि गाएना समुदाय का मान्छे मन भी सामेल छन।[७]
गोत्र संरचना
[सम्पादन | स्रोत सम्पादन]बिश्नोईमन का ३६० गोत्र छन, जिकर समान सामाजिक दर्जा राखन अणि बिहे सम्बन्ध नियमन करन। यी गोत्र मा पवार, गोदारा, खिचोर, धाका, बिरिया आदि छन।[८]
इतिहास
[सम्पादन | स्रोत सम्पादन]बिश्नोई पन्थ को स्थापना गुरु जाम्भेश्वर ले करी। उनका २९ नियम मन शब्दवाणी मा राख्या छन। यी नियम मन मा सफाइ, समाजिक व्यवहार अणि भगवान भक्ति को महत्व दियौ गयो। साथै, जीवजन्तु अणि रुख बिरुवा बचावन मा पनि जोड दियौ गयो।
बिश्नोईमन लाई वातावरण बचावन वाला पहिलो इको–वारियर भन्या जांछ।
२९ नियम
[सम्पादन | स्रोत सम्पादन]बिश्नोईमन का २९ नियम मन मा सफाइ, सत्य बोलन, जीव दया, रुख न काटन, मांस न खान, नशा न करन जस्ता कुरा समेल छन।
तीर्थस्थल
[सम्पादन | स्रोत सम्पादन]बिश्नोईमन का मुख्य पवित्र स्थान मुकाम, समराथल धोरा, पीपासर आदि हुन। यी स्थान मन गुरु जाम्भेश्वर सँग सम्बन्धित छन।
जीवप्रति लगाव
[सम्पादन | स्रोत सम्पादन]बिश्नोईमन थार मरुभूमि का जनावर अणि वनस्पति बचावन मा प्रसिद्ध छन। उनी मन मान्छन कि मरे पछी हरिण को रूप मा जन्म लिन्छन।
प्रमुख व्यक्ति
[सम्पादन | स्रोत सम्पादन]- अमृता देवी – खेजडली बलिदान की नायिका
- भजनलाल बिश्नोई – हरियाणा का पूर्व मुख्यमन्त्री
- रवि बिश्नोई – भारतीय क्रिकेटर
- लरेन्स बिश्नोई – अपराधी
सन्दर्भ
[सम्पादन | स्रोत सम्पादन]- ↑ B.K. Sharma, Seema Kulshreshtha, Asad R. Rahmani (2013). Faunal Heritage of Rajasthan, India. Springer. p. 221. ISBN 978-1461408000.
The Bishnoi, a religious sect turned caste residing in Western Rajasthan is a living apostle of eco-friendliness and conservation.
CS1 maint: multiple names: authors list (link) - ↑ Crooke, William (1896). The Tribes and Castes of the North-western Provinces and Oudh (in अङ्ग्रेजी). Office of the superintendent of government printing.
- ↑ "The Desert Dwellers of Rajasthan – bishnoi and Bhil people". 2004. Archived from the original on 16 December 2019. Retrieved 19 Mar 2016.
- ↑ Akash Kapur, A Hindu Sect Devoted to the Environment, New York Times, 8 Oct 2010.
- ↑ Singh, K.S. (1998). India's communities A-G. OUP. p. 505. ISBN 978-0-19-563354-2.
The name Bishnoi is derived from the words bis (twenty) and nau (nine), and thus denotes the twenty nine tenets of their faith.
- ↑ Ghai, Rajat (2024-10-15). "'Cultivators', 'Curious sect': How the British viewed the Bishnoi". Down To Earth (in अङ्ग्रेजी). Retrieved 2025-01-13.
- ↑ Singh, K.S. (1998). India's communities A-G. OUP. p. 505. ISBN 978-0-19-563354-2.
- ↑ Singh, K.S. (1998). India's communities A-G. OUP. p. 505. ISBN 978-0-19-563354-2.